श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.13.35 
सपुत्रदारा: सामात्या भर्तृव्यसनपीडिता:।
शैलाग्रेभ्य: पतिष्यन्ति समेषु विषमेषु च॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अपने राजा, अपने पुत्रों, पत्नियों और मंत्रियों के मारे जाने से दुःखी सभी वानर पर्वत शिखरों से सम या विषम स्थानों पर कूदकर अपने प्राण त्याग देंगे।
 
All the monkeys, grief-stricken by the loss of their king, along with their sons, wives and ministers, will throw themselves from the mountain peaks into even or odd places and give up their lives.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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