श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.13.30 
वालिजेन तु दु:खेन पीडिता शोककर्शिता।
पञ्चत्वमागता राज्ञी तारापि न भविष्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'तब तो रानी तारा भी जीवित नहीं बचेगी। वह पहले से ही बालि के वियोग की पीड़ा से पीड़ित थी, और इस नए दुःख के कारण शीघ्र ही उसकी मृत्यु हो जाएगी।'
 
‘Then Queen Tara will also not survive. She was already suffering from the pain of separation from Vali, and she will die soon due to this new grief.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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