श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.13.3 
भूयिष्ठं लोलिता लंका रामस्य चरता प्रियम्।
न हि पश्यामि वैदेहीं सीतां सर्वांगशोभनाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए मैंने लंका में अनेक बार खोज की है; किन्तु मुझे विदेहनन्दिनी सीता नहीं मिल रही हैं, जो सब प्रकार से अत्यन्त सुन्दर हैं।
 
To please Lord Rama, I have searched Lanka many times; but I cannot find Videhanandini Sita, who is very beautiful in all respects.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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