श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.13.28 
कृतज्ञ: सत्यसंधश्च सुग्रीव: प्लवगाधिप:।
रामं तथागतं दृष्ट्वा ततस्त्यक्ष्यति जीवितम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब कृतज्ञ और सत्यनिष्ठ वानरराज सुग्रीव श्री रामजी को ऐसी दशा में देखेंगे, तो वे भी अपने प्राण त्याग देंगे॥28॥
 
When the grateful and truthful monkey king Sugreeva sees Sri Rama in such a condition, he too will give up his life. ॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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