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ramayan 5.13.25: उसे संकट में पड़ा देखकर तथा प्राण त्यागने के लिए उद्यत होकर, उससे अत्यन्त स्नेह करने वाले बुद्धिमान् लक्ष्मण भी जीवित न बच सके।   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.13.25 
तं तु कृच्छ्रगतं दृष्ट्वा पञ्चत्वगतमानसम्।
भृशानुरक्तमेधावी न भविष्यति लक्ष्मण:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसे संकट में पड़ा देखकर तथा प्राण त्यागने के लिए उद्यत होकर, उससे अत्यन्त स्नेह करने वाले बुद्धिमान् लक्ष्मण भी जीवित न बच सके।
 
Seeing him in trouble and determined to give up his life, even the intelligent Lakshmana who was very fond of him would not survive. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)