श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.13.24 
परुषं दारुणं तीक्ष्णं क्रूरमिन्द्रियतापनम्।
सीतानिमित्तं दुर्वाक्यं श्रुत्वा स न भविष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के विषय में ऐसे कटु, कठोर, तीखे और विषय-आहत करने वाले वचन सुनकर वह कभी जीवित नहीं बचेगा॥24॥
 
He will never survive after hearing such harsh, harsh, sharp and sensually hurtful words about Sitaji. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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