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श्लोक 5.13.22  |
किं वा वक्ष्यति सुग्रीवो हरयो वापि संगता:।
किष्किन्धामनुसम्प्राप्तं तौ वा दशरथात्मजौ॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘किष्किन्धा पहुँचने पर सुग्रीव, अन्य वानर और दशरथ के वे दोनों राजकुमार मुझसे मिलकर क्या कहेंगे?॥ 22॥ |
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| ‘What will Sugreeva, the other monkeys and those two princes of Dasharatha say after meeting me on reaching Kishkinda?॥ 22॥ |
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