श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.13.22 
किं वा वक्ष्यति सुग्रीवो हरयो वापि संगता:।
किष्किन्धामनुसम्प्राप्तं तौ वा दशरथात्मजौ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘किष्किन्धा पहुँचने पर सुग्रीव, अन्य वानर और दशरथ के वे दोनों राजकुमार मुझसे मिलकर क्या कहेंगे?॥ 22॥
 
‘What will Sugreeva, the other monkeys and those two princes of Dasharatha say after meeting me on reaching Kishkinda?॥ 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas