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श्लोक 5.13.21  |
ममेदं लङ्घनं व्यर्थं सागरस्य भविष्यति।
प्रवेशश्चैव लंकायां राक्षसानां च दर्शनम्॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| ‘तब तो मेरा समुद्र पार करना, लंका में प्रवेश करना और राक्षसों को देखना सब व्यर्थ हो जाएगा।॥21॥ |
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| ‘Then my crossing the ocean, entering Lanka and seeing the demons will all be in vain.॥ 21॥ |
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