श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.13.18 
निवेद्यमाने दोष: स्याद् दोष: स्यादनिवेदने।
कथं नु खलु कर्तव्यं विषमं प्रतिभाति मे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस समाचार को बताने में दोष है और न बताने में भी दोष की संभावना है। ऐसी स्थिति में क्या उपाय अपनाना चाहिए? मुझे तो बताना और न बताना दोनों ही कठिन प्रतीत होते हैं॥18॥
 
There is a flaw in telling this news and there is a possibility of flaw in not telling it. In such a situation, what solution should be adopted? To me, both telling and not telling seem difficult.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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