Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.13.17: चाहे जनक पुत्री सीता को किसी गुप्त घर में छिपाकर रखा गया हो, या समुद्र में गिरकर प्राण त्याग दिए हों, या श्री राम से वियोग की पीड़ा सहन न कर पाने के कारण मृत्यु की शरण ली हो, किसी भी स्थिति में श्री राम को इसकी सूचना देना उचित नहीं होगा; क्योंकि वे अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते हैं। | ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विनष्टा वा प्रणष्टा वा मृता वा जनकात्मजा।
रामस्य प्रियभार्यस्य न निवेदयितुं क्षमम्॥ १७॥
अनुवाद
चाहे जनक पुत्री सीता को किसी गुप्त घर में छिपाकर रखा गया हो, या समुद्र में गिरकर प्राण त्याग दिए हों, या श्री राम से वियोग की पीड़ा सहन न कर पाने के कारण मृत्यु की शरण ली हो, किसी भी स्थिति में श्री राम को इसकी सूचना देना उचित नहीं होगा; क्योंकि वे अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते हैं।
Whether Janaka's daughter Sita has been kept hidden in a secret house, or has lost her life by falling into the ocean, or has taken refuge in death because she was unable to bear the pain of separation from Shri Rama, in any case it would not be appropriate to inform Shri Rama about this; because he loves his wife very much.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥