श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.13.15 
अथवा निहिता मन्ये रावणस्य निवेशने।
भृशं लालप्यते बाला पञ्जरस्थेव सारिका॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अथवा मैं तो यह समझता हूँ कि वे रावण के किसी गुप्त घर में छिपी हुई हैं। हाय! वहाँ वह कन्या पिंजरे में बंद मैना की भाँति बार-बार रो रही होगी॥15॥
 
‘Or I think that they are kept hidden in some secret house of Ravana. Alas! There the girl must be crying repeatedly like a caged myna.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)