श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.13.14 
हा राम लक्ष्मणेत्येवं हायोध्ये चेति मैथिली।
विलप्य बहु वैदेही न्यस्तदेहा भविष्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे राम! हे लक्ष्मण! हे अयोध्यापुरी! इस प्रकार रोते-बिलखते हुए मिथिला की कन्या विदेहनन्दिनी सीता ने अवश्य ही अपना शरीर त्याग दिया होगा॥ 14॥
 
"Oh Rama! Oh Lakshman! Oh Ayodhyapuri! After crying out and lamenting in this manner, Mithila's daughter Videhanandini Sita must have given up her body.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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