श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.13.13 
सम्पूर्णचन्द्रप्रतिमं पद्मपत्रनिभेक्षणम्।
रामस्य ध्यायती वक्त्रं पञ्चत्वं कृपणा गता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हाय! दुखी सीता पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर और कमलदल के समान नेत्रों वाले श्री रामजी के मुख का चिन्तन करती हुई इस संसार से चली गईं॥13॥
 
Alas! Miserable Sita left this world while contemplating the face of Sri Rama, which was as beautiful as the full moon and had eyes like the blooming lotus petals.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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