श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.13.10 
उपर्युपरि सा नूनं सागरं क्रमतस्तदा।
विचेष्टमाना पतिता समुद्रे जनकात्मजा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह भी सम्भव है कि जब रावण उन्हें समुद्र पार ला रहा हो, तब जनकपुत्री सीता छटपटाकर समुद्र में गिर पड़ी हों। ऐसा अवश्य हुआ होगा॥10॥
 
‘It is also possible that when Ravan was bringing them across the ocean, Janak's daughter Sita might have struggled and fallen into the ocean. This must have happened.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)