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ramayan 5.12.8: परन्तु जनकनन्दिनी सीता को मैं क्या उत्तर दूँगा, क्योंकि मैंने उन्हें देखा ही नहीं। अब जबकि सुग्रीव ने अपने द्वारा निर्धारित समय का उल्लंघन कर दिया है, तो मैं अवश्य ही मृत्युपर्यन्त उपवास करूँगा।' 8   |   ramayan सर्ग 5.12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.12.8 
अदृष्ट्वा किं प्रवक्ष्यामि तामहं जनकात्मजाम्।
ध्रुवं प्रायमुपासिष्ये कालस्य व्यतिवर्तने॥ ८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जनकनन्दिनी सीता को मैं क्या उत्तर दूँगा, क्योंकि मैंने उन्हें देखा ही नहीं। अब जबकि सुग्रीव ने अपने द्वारा निर्धारित समय का उल्लंघन कर दिया है, तो मैं अवश्य ही मृत्युपर्यन्त उपवास करूँगा।' 8
 
But what answer will I give to Janakanandini Sita as I have not seen her. Now that Sugreeva has violated the time fixed by him, I will definitely fast till death.' 8
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)