Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.12.4: राक्षसराज रावण की दासी के रूप में काम करने वाली राक्षसियों का रूप बड़ा ही कुरूप है। वे अत्यंत भयंकर और विकराल हैं। उनका तेज भी भयानक है। उनके मुख विशाल हैं और उनकी आँखें भी बड़ी-बड़ी और भयानक हैं। उन्हें देखकर राजा जनक की पुत्री ने भयभीत होकर अपने प्राण त्याग दिए होंगे॥4॥ | ramayan सर्ग 5.12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राक्षसराज रावण की दासी के रूप में काम करने वाली राक्षसियों का रूप बड़ा ही कुरूप है। वे अत्यंत भयंकर और विकराल हैं। उनका तेज भी भयानक है। उनके मुख विशाल हैं और उनकी आँखें भी बड़ी-बड़ी और भयानक हैं। उन्हें देखकर राजा जनक की पुत्री ने भयभीत होकर अपने प्राण त्याग दिए होंगे॥4॥
‘The female demonesses who work as servants for the demon king Ravana have very ugly forms. They are very fierce and monstrous. Their radiance is also terrifying. Their mouths are huge and their eyes are also large and terrifying. Seeing them, the daughter of the king of Janaka must have given up her life in fear.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥