Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.12.17: वे महाकाय वानर वहाँ सभी स्थानों पर विचरण करते थे। रावण के आंतरिक महल में चार इंच चौड़ी कोई जगह भी ऐसी नहीं थी जहाँ वानरराज हनुमान न पहुँचे हों।   |   ramayan सर्ग 5.12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.12.17 
सर्वमप्यवकाशं स विचचार महाकपि:।
चतुरंगुलमात्रोऽपि नावकाश: स विद्यते।
रावणान्त:पुरे तस्मिन् यं कपिर्न जगाम स:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे महाकाय वानर वहाँ सभी स्थानों पर विचरण करते थे। रावण के आंतरिक महल में चार इंच चौड़ी कोई जगह भी ऐसी नहीं थी जहाँ वानरराज हनुमान न पहुँचे हों।
 
Those great apes roamed in all the places there. There was not even a four-inch-wide place in Ravana's inner palace where the monkey king Hanuman had not reached.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)