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ramayan 5.12.1: राजमहल के अन्दर उपस्थित हनुमान जी सीता को देखने के लिए एक-एक करके मंडपों, कलादीर्घाओं और रात्रि विश्राम-कक्षों में गए, किन्तु उन्हें वहाँ भी सुन्दर सीता के दर्शन नहीं हुए॥1॥   |   ramayan सर्ग 5.12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 12: सीता के मरण की आशंका से हनुमान्जी का शिथिल होना, फिर उत्साह का आश्रय ले उनकी खोज करना और कहीं भी पता न लगने से पुनः उनका चिन्तित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.12.1 
स तस्य मध्ये भवनस्य संस्थितो
लतागृहांश्चित्रगृहान् निशागृहान्।
जगाम सीतां प्रतिदर्शनोत्सुको
न चैव तां पश्यति चारुदर्शनाम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
राजमहल के अन्दर उपस्थित हनुमान जी सीता को देखने के लिए एक-एक करके मंडपों, कलादीर्घाओं और रात्रि विश्राम-कक्षों में गए, किन्तु उन्हें वहाँ भी सुन्दर सीता के दर्शन नहीं हुए॥1॥
 
Hanuman, who was present inside the royal palace, went to the pavilions, art galleries and the night-time resting rooms one by one to see Sita, but he did not see the beautiful Sita even there.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)