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ramayan 5.11.47: अन्य सुन्दर स्त्रियों को देखते हुए वीर वानर हनुमान्‌जी को वहाँ सीताजी दिखाई नहीं दीं, इसलिए उन्होंने उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र जाने का निश्चय किया ॥47॥   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.11.47 
तामपश्यन् कपिस्तत्र पश्यंश्चान्या वरस्त्रिय:।
अपक्रम्य तदा वीर: प्रस्थातुमुपचक्रमे॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अन्य सुन्दर स्त्रियों को देखते हुए वीर वानर हनुमान्‌जी को वहाँ सीताजी दिखाई नहीं दीं, इसलिए उन्होंने उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र जाने का निश्चय किया ॥47॥
 
While looking at the other beautiful women, the valiant monkey Hanuman did not see Sita there, so he decided to leave that place and go elsewhere. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)