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ramayan 5.11.45: अतः मैंने शुद्ध हृदय से रावण के सम्पूर्ण अन्तःकक्ष की खोज की है; किन्तु मुझे यहाँ जानकी नहीं दिखी।'   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.11.45 
तदिदं मार्गितं तावच्छुद्धेन मनसा मया।
रावणान्त:पुरं सर्वं दृश्यते न च जानकी॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अतः मैंने शुद्ध हृदय से रावण के सम्पूर्ण अन्तःकक्ष की खोज की है; किन्तु मुझे यहाँ जानकी नहीं दिखी।'
 
Therefore I have searched the entire inner chamber of Ravana with a pure heart; but I do not see Janaki here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)