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ramayan 5.11.44: प्राणी जिस योनि में रहता है, उसी में उसकी खोज होती है। खोई हुई युवती को मृगों में नहीं खोजा जा सकता ॥44॥   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.11.44 
यस्य सत्त्वस्य या योनिस्तस्यां तत् परिमार्गते।
न शक्यं प्रमदा नष्टा मृगीषु परिमार्गितुम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
प्राणी जिस योनि में रहता है, उसी में उसकी खोज होती है। खोई हुई युवती को मृगों में नहीं खोजा जा सकता ॥44॥
 
‘A creature is searched for in the species it belongs to. A lost young woman cannot be searched for among deer. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)