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ramayan 5.11.43: मैं विदेहनन्दिनी सीता को अन्यत्र नहीं खोज सकता था, क्योंकि स्त्रियों को खोजते समय मैं उन्हें सदैव स्त्रियों के बीच ही पाता हूँ।   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.11.43 
नान्यत्र हि मया शक्या वैदेही परिमार्गितुम्।
स्त्रियो हि स्त्रीषु दृश्यन्ते सदा सम्परिमार्गणे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मैं विदेहनन्दिनी सीता को अन्यत्र नहीं खोज सकता था, क्योंकि स्त्रियों को खोजते समय मैं उन्हें सदैव स्त्रियों के बीच ही पाता हूँ।
 
I could not have looked for Videhanandini Sita anywhere else because while looking for women, I always find her among women only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)