Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.11.41: (वह सोचने लगा-) 'इसमें कोई संदेह नहीं कि रावण की पत्नियाँ सुखपूर्वक सो रही थीं और मैंने उन सबको उस अवस्था में भली-भाँति देखा है, फिर भी मेरे मन में कोई विक्षोभ उत्पन्न नहीं हुआ ॥ 41॥ | ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामं दृष्टा मया सर्वा विश्वस्ता रावणस्त्रिय:।
न तु मे मनसा किंचिद् वैकृत्यमुपपद्यते॥ ४१॥
अनुवाद
(वह सोचने लगा-) 'इसमें कोई संदेह नहीं कि रावण की पत्नियाँ सुखपूर्वक सो रही थीं और मैंने उन सबको उस अवस्था में भली-भाँति देखा है, फिर भी मेरे मन में कोई विक्षोभ उत्पन्न नहीं हुआ ॥ 41॥
(He started thinking -) 'There is no doubt that Ravana's wives were sleeping peacefully and I have seen them all very well in that state, yet no disturbance has arisen in my mind. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥