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ramayan 5.11.40: तत्पश्चात् बुद्धिमान हनुमान् के मन में एक नया विचार उत्पन्न हुआ। उनका मन अपने लक्ष्य पर दृढ़ था; अतः यह नया विचार उन्हें अपने कर्तव्य का निश्चय कराने वाला था ॥40॥   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.11.40 
तस्य प्रादुरभूच्चिन्ता पुनरन्या मनस्विन:।
निश्चितैकान्तचित्तस्य कार्यनिश्चयदर्शिनी॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बुद्धिमान हनुमान् के मन में एक नया विचार उत्पन्न हुआ। उनका मन अपने लक्ष्य पर दृढ़ था; अतः यह नया विचार उन्हें अपने कर्तव्य का निश्चय कराने वाला था ॥40॥
 
Thereafter a new thought arose in the mind of the wise Hanuman. His mind was firmly fixed on his goal; hence this new thought was going to make him decide about his duty. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)