श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.11.38 
परदारावरोधस्य प्रसुप्तस्य निरीक्षणम्।
इदं खलु ममात्यर्थं धर्मलोपं करिष्यति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वह सोचने लगा, 'दूसरी स्त्रियों को इतनी गहरी नींद में सोते देखना अच्छा नहीं लगता। इससे तो मेरा धर्म पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।' 38
 
He started thinking, 'It is not good to see other women sleeping in such a deep sleep. This will completely destroy my religion.' 38
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)