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ramayan 5.11.35-36h: निद्रा के प्रभाव में होने के कारण उनका काम-ग्रस्त रूप मुख बंद किये हुए कमल पुष्प के समान प्रतीत हो रहा था।   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  5.11.35-36h 
तासां निद्रावशत्वाच्च मदनेन विमूर्च्छितम्॥ ३५॥
पद्मिनीनां प्रसुप्तानां रूपमासीद् यथैव हि।
 
 
अनुवाद
निद्रा के प्रभाव में होने के कारण उनका काम-ग्रस्त रूप मुख बंद किये हुए कमल पुष्प के समान प्रतीत हो रहा था।
 
Due to being under the influence of sleep, His lust-stricken form looked like a lotus flower with closed mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)