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ramayan 5.11.26-27h: महाकपि, पवनकुमार (पवनपुत्र) ने देखा कि वहाँ सोने और बहुमूल्य पत्थरों से बनी मदिरा से भरे हुए अनेक बर्तन रखे हुए हैं।   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.11.26-27h 
सोऽपश्यच्छातकुम्भानि सीधोर्मणिमयानि च॥ २६॥
तानि तानि च पूर्णानि भाजनानि महाकपि:।
 
 
अनुवाद
महाकपि, पवनकुमार (पवनपुत्र) ने देखा कि वहाँ सोने और बहुमूल्य पत्थरों से बनी मदिरा से भरे हुए अनेक बर्तन रखे हुए हैं।
 
The great ape, Pawankumar (son of the wind), saw that there were various vessels filled with wine made of gold and precious stones. 26 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)