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ramayan 5.11.20-21h: वह मधुशाला, जो मजबूत पलंगों और यहां-वहां रखे हुए सुंदर स्वर्ण सिंहासनों से सजी हुई थी, इतनी जगमगा रही थी कि ऐसा प्रतीत होता था मानो वह बिना आग के भी जल रही हो।   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  5.11.20-21h 
तत्र तत्र च विन्यस्तै: सुश्लिष्टशयनासनै:॥ २०॥
पानभूमिर्विना वह्निं प्रदीप्तेवोपलक्ष्यते।
 
 
अनुवाद
वह मधुशाला, जो मजबूत पलंगों और यहां-वहां रखे हुए सुंदर स्वर्ण सिंहासनों से सजी हुई थी, इतनी जगमगा रही थी कि ऐसा प्रतीत होता था मानो वह बिना आग के भी जल रही हो।
 
That tavern, decorated with sturdy beds and beautiful golden thrones placed here and there, was so sparkling that it appeared to be burning even without any fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)