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ramayan 5.11.19-20h: बड़े-बड़े कीमती पायल और बाजूबंद इधर-उधर पड़े थे। मदिरा के पात्र इधर-उधर बिखरे पड़े थे। नाना प्रकार के फल भी बिखरे पड़े थे। इन सबमें सबसे अधिक दर्शनीय थी पाणभूमि, जो पुष्पों से सुशोभित थी, जो उसकी शोभा को और भी अधिक बढ़ा रही थी।॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  5.11.19-20h 

महानूपुरकेयूरैरपविद्धैर्महाधनै:।
पानभाजनविक्षिप्तै: फलैश्च विविधैरपि॥ १९॥
कृतपुष्पोपहारा भूरधिकां पुष्यति श्रियम्।
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े कीमती पायल और बाजूबंद इधर-उधर पड़े थे। मदिरा के पात्र इधर-उधर बिखरे पड़े थे। नाना प्रकार के फल भी बिखरे पड़े थे। इन सबमें सबसे अधिक दर्शनीय थी पाणभूमि, जो पुष्पों से सुशोभित थी, जो उसकी शोभा को और भी अधिक बढ़ा रही थी।॥19 1/2॥
 
Large precious anklets and armlets were lying here and there. Liquor vessels were lying here and there. Various kinds of fruits were also lying scattered. The most visible of all these was the Paanbhumi, which was decorated with flowers, which was nourishing and enhancing the beauty even more.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)