Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.11.17-18: कृकल नामक पक्षी, नाना प्रकार के बकरे, खरगोश, अधखाए भैंसे, एकाश्ल्या नामक मछली और भेड़ - ये सब पकाकर रखे गए थे। इनके साथ ही अनेक प्रकार की चटनियाँ भी थीं। नाना प्रकार के पेय और खाने-पीने की वस्तुएँ भी थीं। जीभ की थकान दूर करने के लिए नाना प्रकार के राग* और खांडव भी खट्टे-नमकीन पदार्थों के साथ रखे गए थे। 17-18। | ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृकल नामक पक्षी, नाना प्रकार के बकरे, खरगोश, अधखाए भैंसे, एकाश्ल्या नामक मछली और भेड़ - ये सब पकाकर रखे गए थे। इनके साथ ही अनेक प्रकार की चटनियाँ भी थीं। नाना प्रकार के पेय और खाने-पीने की वस्तुएँ भी थीं। जीभ की थकान दूर करने के लिए नाना प्रकार के राग* और खांडव भी खट्टे-नमकीन पदार्थों के साथ रखे गए थे। 17-18।
A bird called Krikal, various types of goats, rabbits, half-eaten buffaloes, a fish called Ekashlya and sheep – all these were cooked and kept. Along with these, there were also many types of chutneys. Various drinks and eatables were also present. To remove the fatigue of the tongue, various types of ragas* and Khandav were also kept along with sour and salty things. 17-18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥