Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.11.13-14: उस महान दैत्यराज के महल में जगत्श्रेष्ठ हनुमानजी ने वह पानभूमि देखी, जो समस्त इच्छित सुखों से परिपूर्ण थी। उस मधुशाला में नाना प्रकार के मृग, भैंसे और सूअर का मांस रखा हुआ था, जिसे हनुमानजी ने देखा। 13-14॥ | ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वकामैरुपेतां च पानभूमिं महात्मन:।
ददर्श कपिशार्दूलस्तस्य रक्ष:पतेर्गृहे॥ १३॥
मृगाणां महिषाणां च वराहाणां च भागश:।
तत्र न्यस्तानि मांसानि पानभूमौ ददर्श स:॥ १४॥
अनुवाद
उस महान दैत्यराज के महल में जगत्श्रेष्ठ हनुमानजी ने वह पानभूमि देखी, जो समस्त इच्छित सुखों से परिपूर्ण थी। उस मधुशाला में नाना प्रकार के मृग, भैंसे और सूअर का मांस रखा हुआ था, जिसे हनुमानजी ने देखा। 13-14॥
In the palace of that great demon king, Hanuman, the best of the world, saw the Panabhoomi, which was full of all the desired pleasures. In that tavern, meat of different kinds of deer, buffalo and pigs was kept, which Hanuman ji saw. 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥