Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.11.12: जैसे महान हाथीराज वन में हाथियों से घिरा हुआ सोता है, वैसे ही राक्षसराज रावण भी उस महल में उन सुन्दर स्त्रियों से घिरा हुआ शोभायमान हो रहा था॥12॥   |   ramayan सर्ग 5.11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.11.12 
स राक्षसेन्द्र: शुशुभे ताभि: परिवृत: स्वयम्।
करेणुभिर्यथारण्ये परिकीर्णो महाद्विप:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे महान हाथीराज वन में हाथियों से घिरा हुआ सोता है, वैसे ही राक्षसराज रावण भी उस महल में उन सुन्दर स्त्रियों से घिरा हुआ शोभायमान हो रहा था॥12॥
 
Just as a great king elephant sleeps surrounded by elephants in a forest, similarly the king of demons Ravana himself looked beautiful surrounded by those beautiful women in that palace. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)