श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.10.54 
आस्फोटयामास चुचुम्ब पुच्छं
ननन्द चिक्रीड जगौ जगाम।
स्तम्भानरोहन्निपपात भूमौ
निदर्शयन् स्वां प्रकृतिं कपीनाम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वे अपनी पूँछें हिलाने और चूमने लगे। वे आनन्दित होने लगे, खेलने लगे, गाने लगे, इधर-उधर घूमने लगे, और वानरों के समान स्वभाव प्रदर्शित करने लगे। कभी वे खम्भों पर चढ़ जाते, कभी भूमि पर कूद पड़ते॥ 54॥
 
They began to thrash and kiss their tails. They began to rejoice, play and sing, moving about here and there, displaying their monkey-like nature. Sometimes they would climb pillars and sometimes jump to the ground.॥ 54॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे दशम: सर्ग:॥ १०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें दसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १०॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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