श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.10.48 
अन्या कमलपत्राक्षी पूर्णेन्दुसदृशानना।
अन्यामालिंग्य सुश्रोणीं प्रसुप्ता मदविह्वला॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर मुख वाली, कमल-नेत्रों वाली तथा मनोहर नितंबों वाली एक अन्य सुन्दरी ने एक अन्य सुन्दरी को आलिंगन किया और आनन्द में सो गई। 48.
 
Another beautiful lady with a face as charming as the full moon, with lotus-eyed eyes and lovely buttocks, had embraced another beautiful lady and fallen asleep in ecstasy. 48.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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