श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.10.46 
कलशीमपविद्धॺान्या प्रसुप्ता भाति भामिनी।
वसन्ते पुष्पशबला मालेव परिमार्जिता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
किसी अन्य युवती ने सोते समय जल से भरा घड़ा लुढ़का दिया था और वह भीगी हुई सो रही थी। उस अवस्था में वह वसन्त ऋतु में विभिन्न रंगों के फूलों से बनी जल से सींची हुई माला के समान प्रतीत हो रही थी। 46.
 
Some other young girl had rolled a pitcher full of water in her sleep and was sleeping in a wet state. In that state she appeared like a garland made of flowers of different colors in the spring season and sprinkled with water. 46.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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