श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.10.45 
काचिदाडम्बरं नारी भुजसम्भोगपीडितम्।
कृत्वा कमलपत्राक्षी प्रसुप्ता मदमोहिता॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
कमल-नेत्रों वाली वह स्त्री मदिरा के नशे में मोहित होकर 'आदम्बर' नामक वाद्य को आलिंगन में धारण करके गहरी नींद में सो गई ॥ 45॥
 
A woman with lotus eyes, captivated by the intoxication of wine, clasping the musical instrument called 'Aadambara' in her embrace, fell into a deep sleep. ॥ 45॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas