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ramayan 5.10.36: कोई अन्य सुन्दरी, नृत्य में निपुण, जिसके सभी अंगों को सृष्टिकर्ता ने सुन्दरता और लावण्य प्रदान किया था, वह कामवश गहरी निद्रा में भी अपने अंगों की कोमल गति (झूलना, हिलना आदि) के साथ नृत्य कर रही थी, और नृत्य के प्रदर्शन से ऐसी सुन्दर प्रतीत हो रही थी, मानो वह जाग रही हो।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.10.36 
अंगहारैस्तथैवान्या कोमलैर्नृत्यशालिनी।
विन्यस्तशुभसर्वांगी प्रसुप्ता वरवर्णिनी॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
कोई अन्य सुन्दरी, नृत्य में निपुण, जिसके सभी अंगों को सृष्टिकर्ता ने सुन्दरता और लावण्य प्रदान किया था, वह कामवश गहरी निद्रा में भी अपने अंगों की कोमल गति (झूलना, हिलना आदि) के साथ नृत्य कर रही थी, और नृत्य के प्रदर्शन से ऐसी सुन्दर प्रतीत हो रही थी, मानो वह जाग रही हो।
 
Some other beautiful woman, adept at dancing, whose all body parts had been blessed with beauty and elegance by the Creator, was dancing with gentle movements of her body parts (swinging, shaking etc.), even while in deep sleep, out of lust, and appearing beautiful by the performance of the dance as if she was awake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)