श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.10.35 
मदव्यायामखिन्नास्ता राक्षसेन्द्रस्य योषित:।
तेषु तेष्ववकाशेषु प्रसुप्तास्तनुमध्यमा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
दैत्यराज की पत्नियाँ मद और मैथुन के परिश्रम से थककर, क्षीण कमर वाली होकर, जिस स्थिति में थीं, वहीं सो गईं ॥35॥
 
The wives of the King of Demons, with emaciated waists, tired from the exertion of intoxication and love-making, fell asleep in whatever positions they were in. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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