श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.10.33 
वज्रवैदूर्यगर्भाणि श्रवणान्तेषु योषिताम्।
ददर्श तापनीयानि कुण्डलान्यंगदानि च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उसने उन सुन्दरियों के कानों के पास हीरे और नीलम से जड़ित सोने की बालियाँ और बाजूबंद देखे।
 
He saw gold earrings and armlets studded with diamonds and sapphires near the ears of those beauties. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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