श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.10.3 
तस्य चैकतमे देशे दिव्यमालोपशोभितम्।
ददर्श पाण्डुरं छत्रं ताराधिपतिसंनिभम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस शय्या के एक ओर उन्होंने चन्द्रमा के समान श्वेत छत्र देखा, जो दिव्य मालाओं से सुशोभित था।
 
On one side of that bed he saw a white canopy, like the moon, which was decorated with divine garlands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)