श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  5.10.23-24 
चूतपुंनागसुरभिर्बकुलोत्तमसंयुत:।
मृष्टान्नरससंयुक्त: पानगन्धपुर:सर:॥ २३॥
तस्य राक्षसराजस्य निश्चक्राम महामुखात्।
शयानस्य विनि:श्वास: पूरयन्निव तद् गृहम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आम और नागकेसर की सुगन्ध से युक्त, मौलश्री की सुगन्ध से सुगन्धित, उत्तम अन्न रस से युक्त और पीने के मधु की गन्ध से युक्त सुगन्धित श्वास, सोये हुए राक्षसराज रावण के विशाल मुख से निकलकर, सारे घर को सुगन्ध से भर रही थी॥23-24॥
 
The fragrant breath, mixed with the fragrance of mango and nagkesar, perfumed by the fragrance of maulsri, combined with the best food juice and mingled with the smell of drinking honey, emanating from the huge mouth of the sleeping demon king Ravana, filled the entire house with fragrance.॥23-24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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