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श्लोक 5.10.22  |
ताभ्यां स परिपूर्णाभ्यामुभाभ्यां राक्षसेश्वर:।
शुशुभेऽचलसंकाश: शृंगाभ्यामिव मन्दर:॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| उन विशाल और गोल भुजाओं से युक्त पर्वताकार राक्षसराज रावण दो चोटियों वाले मंदार पर्वत के समान शोभा पा रहा था॥ ॥ 22॥ |
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| With those large and rounded arms, the mountain-like demon king Ravana looked like Mount Mandara with two peaks.*॥ 22॥ |
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