श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.10.22 
ताभ्यां स परिपूर्णाभ्यामुभाभ्यां राक्षसेश्वर:।
शुशुभेऽचलसंकाश: शृंगाभ्यामिव मन्दर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उन विशाल और गोल भुजाओं से युक्त पर्वताकार राक्षसराज रावण दो चोटियों वाले मंदार पर्वत के समान शोभा पा रहा था॥ ॥ 22॥
 
With those large and rounded arms, the mountain-like demon king Ravana looked like Mount Mandara with two peaks.*॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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