श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.10.21 
ददर्श स कपिस्तस्य बाहू शयनसंस्थितौ।
मन्दरस्यान्तरे सुप्तौ महाही रुषिताविव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान ने पलंग पर पड़ी उनकी दोनों भुजाओं को देखा। वे मंदराचल की गुफा में सो रहे दो उग्र अजगरों के समान लग रहे थे।
 
Hanuman, the great monkey, looked at the two arms lying on the bed. They looked like two furious pythons sleeping in the cave of Mandaraachal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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