श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.10.20 
उत्तमस्त्रीविमृदितौ गन्धोत्तमनिषेवितौ।
यक्षपन्नगगन्धर्वदेवदानवराविणौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सुंदर युवतियाँ उन भुजाओं को धीरे से दबाती थीं। वे उत्तम सुगंधियों से सने हुए थे। वे युद्ध में यक्षों, नागों, गंधर्वों, देवताओं और दानवों को रुलाने में सक्षम थीं।
 
Beautiful young women would press those arms gently. They were smeared with the finest perfumes. They were capable of making Yakshas, ​​Nagas, Gandharvas, Gods and Demons cry in the war.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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