श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.10.16 
ऐरावतविषाणाग्रैरापीडनकृतव्रणौ।
वज्रोल्लिखितपीनांसौ विष्णुचक्रपरिक्षतौ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के समय उन भुजाओं पर ऐरावत हाथी के दाँतों के अग्रभाग के प्रहारों के चिह्न थे। उन भुजाओं का आधार या कन्धा बहुत मोटा था और उन पर वज्र के प्रहारों के चिह्न भी दिखाई दे रहे थे। वे भुजाएँ किसी समय भगवान विष्णु के चक्र से भी क्षत-विक्षत हो गई थीं॥16॥
 
During the war, those arms had the marks of the blows made by the front part of the tusks of the elephant Airavat. The base or shoulders of those arms were very thick and the marks of blows made by thunderbolts were also visible on them. Those arms had also been mutilated by Lord Vishnu's Chakra at some point of time.॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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