श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.10.15 
काञ्चनांगदसंनद्धौ ददर्श स महात्मन:।
विक्षिप्तौ राक्षसेन्द्रस्य भुजाविन्द्रध्वजोपमौ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उसने दोनों भुजाएँ फैलाए हुए, सुवर्णमय बाजूबंदों से सुशोभित तथा इन्द्र के ध्वज के समान शोभायमान विशाल राक्षसराज रावण को देखा॥15॥
 
He saw the huge demon king Ravana with his two arms outstretched, adorned with golden armlets and looking like the flag of Indra.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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