श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  5.1.99 
चामीकरमहानाभ देवगन्धर्वसेवित।
हनूमाँस्त्वयि विश्रान्तस्तत: शेषं गमिष्यति॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं और गंधर्वों से सेवित तथा विशाल स्वर्ण शिखर वाले मैनाक! तुम पर विश्राम करके हनुमान जी प्रसन्नतापूर्वक शेष यात्रा तय करेंगे॥99॥
 
Mainak, served by the gods and Gandharvas and having a huge golden peak! After resting on you, Hanuman ji will happily cover the remaining journey. 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)