श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  5.1.84 
तताप नहि तं सूर्य: प्लवन्तं वानरेश्वरम्।
सिषेवे च तदा वायू रामकार्यार्थसिद्धये॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
वे भगवान राम का कार्य पूरा करने के लिए जा रहे थे; इसलिए उस समय सूर्यदेव ने वानरराज को कोई ताप नहीं दिया तथा पवनदेव ने भी उनकी सेवा की।
 
He was on his way to accomplish Lord Rama's task; therefore, at that time, the Sun God did not cause any heat to the King of the Monkeys, and the Wind God also served him. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)