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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 78
श्लोक
5.1.78
शुशुभे स महातेजा महाकायो महाकपि:।
वायुमार्गे निरालम्बे पक्षवानिव पर्वत:॥ ७८॥
अनुवाद
अत्यन्त तेजस्वी, विशाल वानर हनुमान्जी आकाश में बिना किसी आधार के पंखयुक्त पर्वत के समान दिखाई दे रहे थे। 78.
The extremely illustrious, huge ape Hanuman appeared like a winged mountain in the sky, without any support. 78.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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