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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 77
श्लोक
5.1.77
श्वेताभ्रघनराजीव वायुपुत्रानुगामिनी।
तस्य सा शुशुभे छाया पतिता लवणाम्भसि॥ ७७॥
अनुवाद
खारे समुद्र में लेटे हुए पवनपुत्र हनुमान की छाया उनके पीछे-पीछे श्वेत बादलों की पंक्ति के समान प्रतीत हो रही थी।
Lying in the salty sea, the shadow of Hanuman, the son of the wind, following him looked like a row of white clouds. 77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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